REET 2022: राजस्थान रीट परीक्षा में पूछे जा सकते है बाल-विकास शिक्षा शास्त्र से ये सवाल, अभी पढ़ें

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राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा रीट परीक्षा के लिए शुरू हो चुकी है राजस्थान के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक बनने की इच्छा रखने वाले अभ्यर्थी 18 मई तक रीट परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं।इस आर्टिकल में हम रीट परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण विषय बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के कुछ बेहद महत्वपूर्ण प्रश्नों का अध्ययन करेंगे.

Child Development and Pedagogy Practice set for REET Exam 2022

1. In order to address learners from diverse backgrounds, a teacher should विविध पृष्ठभूमियों के अधिगमकर्ताओं को संबोधित करने हेतु, एक अध्यापक को

(a) use standardized assessment for all. / सभी के लिए मानकीकृत आंकलनों का इस्तेमाल करना चाहिए। 

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(b) use statements that strengthen negative stereotypes. / ऐसे कथनों का इस्तेमाल करना चाहिए।जो नकारात्मक रूढ़िबद्ध धारणाओं को मजबूत करें। 

(c) avoid talking about aspects related to diversity. / विविधता संबंधी मुद्दों पर बातचीत टालनी चाहिए।

(d) draw examples from diverse settings. विविध विन्यासों से उदाहरण लेने चाहिए। | 

Ans. (d) 

  • विविध पृष्ठभूमियों के अधिगमकर्ताओं को संबोधित करने हेतु, एक अध्यापक को विविध विन्यासों से उदाहरण लेने चाहिए ताकि सभी बच्चे सुगमता से अधिगम अनुभव प्राप्त कर सकें। 
  • समावेशी शिक्षा के अंतर्गत विभिन्न पृष्ठभूमि, योग्यता, क्षमता व आवश्यकता वाले विद्यार्थी सामान्य विद्यालय के सामान्य कक्षा कक्ष में सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा प्राप्त करते हैं। ऐसी स्थिति में  शिक्षक को विभिन्न प्रकार के सामान्य जनजीवन से सम्बन्धित उदाहरणों को कक्षा में प्रस्तुत करना चाहिए, जिससे सभी विद्यार्थी लाभान्वित हो सकें।

2. Which of the following belief is good for learning ?/अधिगम के लिए निम्न में से कौन-सी धारणा उपयुक्त है?

(a) Efforts don’t make any difference. प्रयासों से कोई फर्क नहीं पड़ता।

(b) Failure is uncontrollable/असफलता अनियंत्रित है। 

(c) Ability is improvable. / योग्यता सुधार्य है।

(d) Ability is fixed. /योग्यता अटल है।

Ans. (c) 

  • ‘योग्यता सुधार्य है’, यह अधिगम की धारणा को प्रस्तुत करने के लिए सबसे उपयुक्त कथन है। 
  • यहाँ योग्यता सुधार्य का अर्थ किसी भी योग्यता से है जिसे व्यक्ति ने अर्जित किया है, अधिगम द्वारा उसमें सुधार किया जा सकता है। 
  • मॉर्गन और गिलीलैण्ड ने इसको स्पष्ट करते हुए कहा है, “अधिगम या सीखना, अनुभव के परिणामस्वरूप प्राणी के व्यवहार में कुछ परिमार्जन (सुधार) है, जो कम से कम कुछ समय के लिए प्राणी द्वारा धारण किया जाता है।

3. Conceptual understanding among students is likely to improve in the settings which emphasise on / निम्न में से कौन-सी परिपाटी, विद्यार्थियों में संकल्पनात्मक समझ में बढ़ोत्तरी करने में सहायक है?

(a) frequent examinations/बारंबार परीक्षाएँ।

(b) inquiry and dialogue./अन्वेषण और संवाद।

(c) competitions/ प्रतिस्पर्धा आधारित प्रतिस्पर्धाएँ।

(d) textbook-centric pedagogy पाठ्य पुस्तक केन्द्रित शिक्षाशास्त्र ।

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Ans.(b): 

  • अन्वेषण और संवाद, विद्यार्थियों में संकल्पनात्मक समझ में बढ़ोत्तरी करने में सहायक होती है। 
  • दूसरे शब्दों में, जब विद्यार्थियों को खोज करने (अन्वेषण करने), संवाद करने या सामाजिक अंतर्क्रिया स्थापित करने के पर्याप्त अवसर दिये जाते हैं, तब उनमें संकल्पनात्मक समझ बेहतर होती है। इसलिए आवश्यक है कि विद्यार्थियों को ऐसे कार्यों में लगाया जाए।

4. It is difficult for children to learn when बच्चों को सीखने में कठिनाई होती है, जब-

(a) learning is socially contextualized. अधिगम सामाजिक संदर्भ में हो। 

(b) content is represented through multiple ways. विषय-वस्तु को बहुरूपों में प्रस्तुत किया गया हो। 

(c) information is presented in disconnected chunks /सूचना अलग-अलग टुकड़ों में प्रस्तुत की जाए।

(d) they are intrinsically motivated / वो आंतरिक रूप से अभिप्रेरित हो ।

Ans. (c) : 

  • बच्चों को सीखने में कठिनाई होती है, जब सूचना को अलग-अलग टुकड़ों में प्रस्तुत किया जाता है। इसलिए कक्षा शिक्षण करते समय अध्यापक को यह ध्यान रखना चाहिए कि सूचनाएँ एक निश्चित क्रम में हों तथा वे आपस में अंतःसम्बन्धित भी हों।
  • शिक्षक को यह भी कोशिश करना चाहिए कि सूचना के मुख्य स्रोत के बारे में भी विद्यार्थियों को यथासम्भव बताएं। इससे विद्यार्थियों के मस्तिष्क में एक संरचना बन जाती है और अधिगम अनुभव स्थायी होता है।

5. Individual differences in development of children can be attributed to बच्चों के विकास की व्यक्तिगत विभिन्नताओं को किस पर प्रतिरोपित किया जा सकता है?

(a) neither heredity nor environment. ना आनुवंशिकता पर ना पर्यावरण पर। 

(b) interplay of heredity and environment. आनुवंशिकता एवं पर्यावरण की पारस्परिकता पर। 

(c) heredity only/केवल आनुवंशिकता पर।

(d) environment only/केवल पर्यावरण पर। | 

Ans. (b)

  • बच्चों के विकास की व्यक्तिगत विभिन्नताओं को आनुवंशिकता एवं पर्यावरण की पारस्परिकता पर प्रतिरोपित किया जा सकता है। व्यक्तिगत विभिन्नता का पहला प्रमुख कारण आनुवंशिकता होती है और दूसरा प्रमुख कारण पर्यावरण होता है।
  • पियरसन और गाल्टन जैसे मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि, व्यक्तियों की शारीरिक मानसिक और चारित्रिक विभिन्नताओं का एक मात्र कारण उनका वंशानुक्रम या आनुवंशिकता ही है

6. Best state of learning is अधिगम की सर्वोत्तम अवस्था कौन-सी है?

(a) moderate arousal, no fear/ संतुलित उत्तेजना, कोई भय नहीं

(b) no arousal, no fear/ कोई उत्तेजना नहीं, कोई भय नहीं

(c) high arousal, high fear. / उच्च उत्तेजना, उच्च भय 

(d) low arousal, high fear./ निम्न उत्तेजना, उच्च भय

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Ans. (a)

  •  संतुलित उत्तेजना, कोई भय नहीं, अधिगम की सर्वोत्तम अवस्था मानी जाती है। दूसरे शब्दों में, यदि अधिगमकर्ता किसी कार्य को लेकर ज्यादा उत्तेजित है तब भी वह उस कार्य का बेहतर अधिगम नहीं कर पायेगा.
  •  इसी प्रकार यदि अधिगमकर्ता में किसी कार्य को लेकर भय (डर) है तब भी वह उस कार्य को नहीं सीख पायेगा। इसलिए संतुलित उत्तेजना, कोई भय नहीं अधिगम की सर्वोत्तम अवस्था होती है, जिसमें अधिगमकर्ता बेहतर ढंग से सीखता है।

7. Evaluation practices should aim at/ मूल्यांकन पद्धतियों का लक्ष्य होना चाहिए 

(a) identifying students needs and requirements. विद्यार्थियों की जरूरतों एवं आवश्यकताओं की पहचान करना।

(b) identification of high-achievers for prize | •distribution. / पुरस्कार वितरण हेतु उच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की पहचान करना।

(c) labelling of students. विद्यार्थियों को नामांकित करना।

(d) segregation of students for ability based groups/योग्यता-आधारित समूहों में विद्यार्थियों को विभाजित करना ।

Ans. (a)

  • मल्यांकन पद्धतियों का मुख्य लक्ष्य विद्यार्थियों की जरूरतों एवं आवश्यकताओं की पहचान करना होना चाहिए। 
  • इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर रचनात्मक मूल्यांकन की व्यवस्था की गयी है। रचनात्मक मूल्यांकन में विद्यार्थियों को सीखने में आयी कठिनाइयों की पहचान की जाती है और फिर उपचारात्मक शिक्षण के माध्यम से उन कठिनाइयों को दूर किया जाता है।

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