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CTET July 2022 Sanskrit Practice Set: शिक्षक पात्रता परीक्षा में पूछे जाएँगे ऐसे सवाल, अभी पढ़ें

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CTET July 2022 Sanskrit Practice Set: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा आयोजित की जाने वाली सीटेट परीक्षा का जुलाई 2022 सेशन नोटिफिकेशन जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जारी किया जाएगा. शिक्षक बनने की इच्छा रखने वाले लाखों व्यक्ति इस परीक्षा में शामिल होंगे. यदि आप भी सीटेट परीक्षा में शामिल होने जा रहे हैं तो किस आर्टिकल में भी की जानकारी आपकी यह बेहद महत्वपूर्ण है. 

इस आर्टिकल में हम विगत सीटेट परीक्षाओं में पूछे गए संस्कृत भाषा के कुछ बेहद महत्वपूर्ण सवालों का अध्ययन करेंगे. इन सवालों का अध्ययन करके आप सीटेट परीक्षा में संस्कृत भाषा से पूछे जाने वाले सवालों के पैटर्न को समझ सकते हैं.

CTET July 2022 Sanskrit Languadge Practice Set- विगत CTET परीक्षा में पूछे गए सवाल

Q. छात्राणां भाषणकौशल विकासार्थं ध्वनिक्रमस्य उपयोगः कथं करणीयः ?

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(a) भाषणयुक्त-श्रुतलेखद्वारा

(b) व्यंग्यचित्राणां अथवा अन्य-दृश्यसामग्र्याः प्रयोगद्वारा 

(c) मूलतत्त्वाधारित-कथायाः विवरण-कथा द्वारा

(d) अभिसंचित-ध्वनि-श्रवण-पश्चात् व्याख्याद्वारा अथवा कथाकथनद्वारा श्रुतसामग्रीमाधारीकृत्य

Ans : (d)

व्याख्या- छात्रों के बीच भाषण कौशल के विकास के लिए | अभिसंचित ध्वनि-श्रवण के उपरान्त सुनी गई (श्रुत) सामग्री को | आधार बनाकर व्याख्या द्वारा अथवा कथाकथन द्वारा उपयोग करना चाहिए।

Q. ‘ एकालाप’- द्वारा त्रयाणां उपकौशलानाम् आकलनं क्रियते

(a) स्वरलहरी (Tone), ध्वनिगुणः, गतिः

(b) ध्वनिगुणः, शैली, वक्तुः प्रस्तुतिः

(c) वक्त्रानुमानम्, स्वरलहरी, सन्दर्भः

(d) भावभङ्गिमा, वक्त्रानुमानम् वक्तुः प्रस्तुतिः 

Ans : (a)

व्याख्या- एकालाप (वार्तालाप) द्वारा तीन उपकौशलों का आकलन किया जाता है। वे हैं- (1) स्वर लहरी (2) ध्वनि गुण और (3) गति ।

Q. भाषा-अर्जनदृष्ट्या असम्यक् परिवेषेण अभिप्रायः अस्ति

(a) लक्ष्यभाषायाः प्रयोगः न क्रियते 

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(b) यदा कदा अनुवादस्य अपि साहाय्यं स्वीक्रियते

(c) कक्षायां छात्राः अपि सक्रियाः भवन्ति

(d) लक्ष्यभाषापाठनसमये मातृभाषायाः प्रयोगः यदा कदा क्रियते 

Ans : (a)

व्याख्या- भाषा-अर्जन की दृष्टि से असम्यक् परिवेश का अभिप्राय दिये गये विकल्पों में सही विकल्प है- ‘लक्ष्य भाषा का प्रयोग न करना’ क्योंकि लक्ष्य भाषा का प्रयोग यहाँ पर अनुचित रहेगा।

Q. द्वन्द्वसमासस्य उदाहरणम्

(a) पीताम्बरः

(b) नीलोत्पलम्

(c) रामकृष्णौ

(d) राजपुरुषः

Ans : (c)

व्याख्या- द्वन्द्व समास का उदाहरण दिये गये विकल्पों में है- ‘रामकृष्णौ’ है। जहां पर दोनों पद प्रधान हो तथा उनके मध्य में ‘और’ शब्द का लोप हो, द्वन्द्व समास होता है। अन्य उदाहरण है | जय-पराजय, लाभालाभौ, रामलक्ष्मणौ, लवकुश आदि

Q.. परिप्रश्नेन अधिगमनेन अभिप्रायः अस्ति 

(a) व्याख्यासमये सार्थकध्वनीनां उच्चारणम्

(b) प्रश्नैः समस्यानां समाधानस्य प्रयासः

(c) भाषाशिक्षणार्थं सिद्धान्त प्रतिपादनम्

(d) व्यवस्थितरूपेण विषयसामग्र्याः प्रस्तुतिः

Ans : (b)

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व्याख्या- परिप्रश्न से प्रश्न की समस्या का समाधान होता है। | इससे प्रश्नगत कथ्य की मूल बातों की सही जानकारी प्राप्त होती है। परिप्रश्न अधिगमन का प्रयोग ही प्रश्नगत समस्या के समाधान करने चित्वा के प्रयास के रूप में जाना जाता है।

Q. भाषाशिक्षणार्थं महत्त्वपूर्ण अवस्था अस्ति

(a) यदा विद्यार्थिनः तार्किक चिन्तनयुक्ताः भवन्ति 

b) यदा छात्राः अर्थप्राप्त्यर्थं शब्दकोशान् द्रष्टुं समर्थाः भवन्ति

(c) यदा छात्राः प्रश्नान् प्रष्टुं समर्थाः भवन्ति

 (d) यदा बालाः भाषार्जने सक्षमाः भवन्ति

Ans : (d)

व्याख्या- भाषा शिक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका यह है कि जिससे बालक भाषा अर्जन में पूर्ण सक्षम हो । अर्थात् उनको इस तरह से के लिए पढ़ाया जाय कि उनकी समझ में ‘भाषागत जानकारी का विकास’ हो। मग्री को जाय।

Q. सारांशं लेखितुम् आवश्यके द्वे कौशले स्तः ।

(a) स्वशब्दैः पाठ्यवस्तुनः पुनर्लेखनम् 

(b) मुख्यं सामान्यं च बिन्दु-संज्ञानम्

(c) सम्यक् लेखने योजकानां प्रयोगः

(d) शब्दानां स्थाने संकेतानां प्रयोगः सम्यक्लेखनम्

Ans : (b)

व्याख्या- सारांश लेखन के लिए दो कौशल आवश्यक होते हैं। वे – ‘सामान्य और प्रमुख’ तथा बिन्दुओं का संज्ञान। अवधारणं अवगन्तं समर्थाः

Q.यदा छात्राः कालस्य अवधारणं अवगन्तुं समर्थाः न भवन्ति तदा उपचारात्मकं कार्यं किं भविष्यति?

(a) सम्बद्धसूत्राणां रटनम्

(b) सम्बद्धलकाराणाम् अभ्यासः

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(c) सन्दर्भानुगुणं भाषाभ्यासः

(d) लकारानुगुणं रूपाणां पुनः पुनः स्मरणम्

Ans : (d)

व्याख्या- जब छात्र काल की अवधारण करने में समर्थ नहीं होते। तब उपचारात्मक कार्य लकार के अनुरूप रूपों लट्लकार, | लोटलकार का बार-बार स्मरण कराया जाना अभीष्ट होगा।

Q.सततव्यापकमूल्याङ्कनान्तर्गते 

(a) छात्राः सर्वदा आनन्देन कार्यनिमग्नाः भवन्ति

(b) छात्राः शैक्षणिकभारं अधिकं निर्वहन्ति

(c) छात्राः पूर्णतया अध्यापकानां नियन्त्रणे सन्ति 

(d) छात्राणां मूल्याङ्कनाकलनं नियमितरूपेण क्रियते

Ans : (d)

व्याख्या- सतत् व्यापक मूल्यांकन के अन्तर्गत छात्रों का मूल्यांकन और आकलन नियमित रूप से किया जाता है। क्योंकि नियमित रूप में से मूल्यांकन करने से छात्रों की व्यापक परख हो जाती है।

Q. सृजनात्मकपठनस्य उदाहरणम्

(a) सम्बद्धसूचनार्थ अन्तर्जालदर्शनम् 

(b) भिन्नदृष्टिकोणेन नाटकीकरणं भूमिका निर्वहणम् पुनर्लेखनं

(c) अर्थप्राप्त्यर्थं वाचनम्

(d) परामर्शनकार्यं ग्रन्थालये अधिकं करणीयम्

Ans : (b)

व्याख्या- सृजनात्मक पठन का उदाहरण है- भिन्न दृष्टिकोण से नाटकीकरण को भूमिका का निर्वहन और पुनर्लेखन से है। | सृजनात्मक पठन से व्यक्तित्व का बहुमुखी विकास अवश्यम्भावी हो जाता है।

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Q. विहङ्गम-दृष्ट्या (skimming) पठनेन अभिप्रायः अस्ति 

(a) विशिष्टम् अर्थम् अथवा सूचनां प्राप्तुं सम्पूर्णपाठ्यवस्तुनः गभीरतया पठनम्

(b) लिखितसामग्र्या सार्थकसूचनां प्राप्तुं पठनम् 

(c) पठितसामग्र्या विचारार्थं निहितार्थं सूचनार्थं च निर्णयः

(d) सामान्य-भावार्थं विचारम् अथवा सारं प्राप्तुं पाठ्यवस्तुनः शीघ्रतया पठनम्

Ans : (a)

व्याख्या- विहंगम दृष्टि से पढ़ने का आशय विशिष्ट अर्थ अथवा सूचना प्राप्त करने हेतु सम्पूर्ण पाठ्य वस्तुओं का गम्भीरता पूर्वक पठन से है।

Q. पाठ्यवस्तु समग्रता इत्यनेनाभिप्रायः अस्ति

(a) कस्मिंश्चित् अनुच्छेदे प्रदत्त-सूचनानुगुणं प्रस्तुतीकरणम्

(b) दीर्घ-अनुच्छेदात् सूचनालेखनम् 

(c) विभिन्न-अनुच्छेदेषु वाक्येषु वा परस्परं सम्बद्धतां सर्वेषां नामपदानां प्रयोगः

(d) कथावर्णनानुगुणं अनुच्छेदव्यवस्था

Ans : (c)

व्याख्या- पाठ्यवस्तुओं की समग्रता का अभिप्राय विभिन्न अनुच्छेदों और वाक्यों के बीच परस्पर सम्बद्धता दिखाने के लिए सभी नाम पदों का प्रयोग से है।

इस आर्टिकल में हमने सीटेट परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए संस्कृत भाषा के बहुविकल्पीय प्रश्नों (CTET July 2022 Sanskrit Practice Set) का अध्ययन किया है सीटेट सहित सभी शिक्षक पात्रता परीक्षा की तैयारी के लिए आप हमारे टेलीग्राम चैनल के सदस्य बन सकते हैं ज्वाइन लिंक नीचे दी गई है.

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